आरती संग्रह

विष्णु आरती

विष्णु जी की महिमा।

आरती का महत्व

विष्णु जी की कई आरतियाँ हैं। 'ॐ जय जगदीश हरे' सबसे प्रसिद्ध। साथ ही गुरुवार पूजा में विष्णु आरती।

विष्णु आरती किसकी है?

यह आरती भगवान विष्णु को समर्पित है। आरती का अर्थ – दीप के माध्यम से देवता का स्वागत और स्तुति।

कब गाई जाती है?

आरती के फायदे

आरती की विधि

  1. शुद्ध स्थान पर देवता की मूर्ति/चित्र
  2. 5 बत्ती वाला दीपक (शुद्ध घी)
  3. धूप, फूल, प्रसाद की तैयारी
  4. घंटा बजाते हुए शुरू
  5. आरती को घड़ी की दिशा में फिराएं
  6. 4 बार – चरण, नाभि, मुख, सर्व अंग
  7. सभी मिलकर गाएं
  8. अंत में आरती का प्रसाद आँखों पर

संगीत और लय

विष्णु आरती का संगीत भक्तिमय और गति में है। पूरे परिवार और समाज द्वारा एक साथ गाने की परंपरा है। मंदिरों में सुबह-शाम।

पाठ कहाँ मिलेगा?

विष्णु आरती के पूर्ण शब्दों के लिए किसी भी मंदिर के प्रसाद ग्रंथ या प्रामाणिक धार्मिक पुस्तकों का संदर्भ लें। मंदिर में सीखने का अवसर भी मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपके प्रश्न

॥ ॐ ॥
विष्णु आरती रोज़ गा सकते हैं?
हाँ, यह आरती रोज़ गाई जा सकती है। सुबह-शाम पूजा के समय श्रेष्ठ।
आरती के बाद क्या करें?
आरती के बाद देवता को नमस्कार, प्रसाद ग्रहण, और कुछ देर ध्यान।