Puranic Stories

वेद-पुराणों की अमर कथाएं

समुद्र मंथन, दशावतार, शिव-पार्वती विवाह, भस्मासुर वध, रामायण और महाभारत के प्रसंग, प्रह्लाद, ध्रुव, सावित्री – जीवन के गूढ़ सत्य सरल कथा रूप में।

पौराणिक कथाएं केवल कहानियाँ नहीं हैं – ये सनातन धर्म के मूल्यों, आदर्शों और जीवन सत्य को सरल रूप में समझाने का माध्यम हैं। वेद, उपनिषद, 18 पुराण, रामायण, महाभारत और स्मृति ग्रंथों में इन कथाओं का विस्तृत वर्णन है।

हर कथा में एक संदेश छिपा है – त्याग, सत्य, धर्म, भक्ति, कर्म। यहाँ हमने प्रमुख पौराणिक कथाओं को श्रेणीवार प्रस्तुत किया है।

विष्णु दशावतार कथाएं

शिव पुराण की कथाएं

रामायण के अमर प्रसंग

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कथाएं पढ़ने का महत्व

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पौराणिक कथाएं – जिज्ञासाओं के उत्तर

॥ ॐ ॥
18 महापुराण कौन-कौन से हैं?
18 महापुराण हैं – ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, शिव पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कंडेय पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, लिंग पुराण, वराह पुराण, स्कंद पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण और ब्रह्मांड पुराण।
रामायण के कितने कांड हैं?
वाल्मीकि रामायण के 7 कांड हैं – बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड, किष्किंधाकांड, सुंदरकांड, लंकाकांड और उत्तरकांड। तुलसीदास की रामचरितमानस में भी 7 सोपान हैं।
महाभारत में कितने पर्व हैं?
महाभारत में 18 पर्व हैं – आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक, स्त्री, शांति, अनुशासन, अश्वमेधिक, आश्रमवासी, मौसल, महाप्रस्थानिक और स्वर्गारोहण पर्व।
समुद्र मंथन में कौन-कौन से 14 रत्न निकले थे?
समुद्र मंथन से निकले 14 रत्न – हलाहल (विष), कामधेनु, उच्चैःश्रवा (अश्व), ऐरावत (हाथी), कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सराएं, चंद्रमा, लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), पारिजात, पांचजन्य (शंख), धन्वंतरि और अंत में अमृत।
विष्णु का पहला अवतार कौन सा है और क्यों?
विष्णु का प्रथम अवतार मत्स्य (मछली) है। जब सृष्टि के अंत में प्रलय आई और वेदों की रक्षा करनी थी, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर मनु की नौका को प्रलय के जल से बचाया और वेदों की रक्षा की।
गीता का उपदेश कब और कहाँ दिया गया?
भगवद्गीता का उपदेश महाभारत के युद्ध की शुरुआत से ठीक पहले कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया। अर्जुन अपने परिजनों से युद्ध करने को विषादग्रस्त थे, तब कृष्ण ने 18 अध्यायों में जीवन का पूर्ण सार समझाया।
क्या ये कथाएं वास्तविक हैं?
हिन्दू परंपरा में इन कथाओं को ऐतिहासिक-आध्यात्मिक सत्य माना जाता है। पुरातत्व और भूगोल के प्रमाण (राम सेतु, द्वारका के अवशेष, कुरुक्षेत्र) भी कई कथाओं की पुष्टि करते हैं। लेकिन इनका मुख्य उद्देश्य इतिहास बताना नहीं, जीवन के गूढ़ सत्य सिखाना है।