Hindu Festivals

हिन्दू त्यौहार – आस्था, उत्सव और परंपरा

दीवाली, होली, नवरात्रि, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी से लेकर हर व्रत-पर्व तक – कथा, तिथि, महत्व और मनाने की विधि। 12 माह का हिन्दू कैलेंडर एक जगह।

सनातन धर्म में हर माह, हर तिथि एक त्यौहार है। हिन्दू त्यौहार केवल उत्सव नहीं हैं – ये प्रकृति, ऋतु, देवी-देवताओं और जीवन के मूल्यों से जुड़े गहरे प्रतीक हैं। हर त्यौहार की एक कथा है, एक महत्व है, और मनाने की एक विशेष विधि है।

प्रमुख हिन्दू त्यौहार

वर्ष के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्यौहार – हर एक की अपनी कहानी, अपना रंग।

दी

दीवाली / दीपावली

कार्तिक अमावस्या को मनाई जाने वाली प्रकाश का पर्व। भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में। लक्ष्मी-गणेश पूजन।

हो

होली

फाल्गुन पूर्णिमा को। होलिका दहन, रंगों का त्यौहार। भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा।

नवरात्रि

9 दिन, माँ दुर्गा के 9 रूप। शारदीय (अश्विन) और चैत्र नवरात्रि। कलश स्थापना, कन्या पूजन।

शि

महाशिवरात्रि

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी। शिव-पार्वती विवाह की रात। रुद्राभिषेक, जागरण, उपवास।

जन्माष्टमी

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी। श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। मथुरा-वृंदावन में विशेष धूम। दही-हांडी।

गणेश चतुर्थी

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी। गणपति बप्पा का जन्मोत्सव। 10 दिन स्थापना, फिर विसर्जन।

दु

दशहरा / विजयादशमी

अश्विन शुक्ल दशमी। राम-रावण युद्ध में राम की विजय। असत्य पर सत्य की जीत।

रक्षा बंधन

श्रावण पूर्णिमा। भाई-बहन का पर्व। राखी बाँधना, मिठाई, उपहार।

करवा चौथ

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जल व्रत।

अन्य महत्वपूर्ण पर्व

हिन्दू कैलेंडर – 12 माह और प्रमुख त्यौहार

चैत्र – वैशाख (मार्च–मई)

  • गुड़ी पड़वा / नव वर्ष
  • चैत्र नवरात्रि
  • रामनवमी
  • हनुमान जयंती
  • अक्षय तृतीया

ज्येष्ठ – आषाढ़ (मई–जुलाई)

  • वट सावित्री व्रत
  • गंगा दशहरा
  • निर्जला एकादशी
  • जगन्नाथ रथ यात्रा
  • गुरु पूर्णिमा

श्रावण – भाद्रपद (जुलाई–सितंबर)

  • सावन सोमवार
  • रक्षा बंधन
  • जन्माष्टमी
  • हरतालिका तीज
  • गणेश चतुर्थी

आश्विन – कार्तिक (सितंबर–नवंबर)

  • पितृ पक्ष / श्राद्ध
  • शारदीय नवरात्रि
  • दशहरा
  • करवा चौथ
  • दीवाली, भाई दूज

मार्गशीर्ष – पौष (नवंबर–जनवरी)

  • विवाह पंचमी
  • गीता जयंती
  • मोक्षदा एकादशी
  • पौष पूर्णिमा
  • लोहड़ी

माघ – फाल्गुन (जनवरी–मार्च)

  • मकर संक्रांति
  • वसंत पंचमी
  • माघ पूर्णिमा
  • महाशिवरात्रि
  • होली / होलिका दहन

त्यौहार क्यों मनाए जाते हैं?

हिन्दू त्यौहार चार उद्देश्यों से जुड़े हैं –

त्यौहारों पर क्या करें, क्या न करें

त्यौहार पर विशेष पूजा करवानी हो? जैसे जन्माष्टमी पर सत्यनारायण कथा, नवरात्रि में कन्या पूजन और माँ की चुनरी, शिवरात्रि पर रुद्राभिषेक – सब कुछ Aastha.app के अनुभवी पंडितों द्वारा करवाया जा सकता है।

संबंधित विषय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिन्दू त्यौहार – जिज्ञासाओं के उत्तर

॥ ॐ ॥
दीवाली कब मनाई जाती है और क्यों?
दीवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है (अक्टूबर/नवंबर)। इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया – तभी से यह प्रकाश का पर्व बन गया। साथ ही, इस दिन माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा भी होती है।
नवरात्रि में नौ दिन माँ के कौन-कौन से रूपों की पूजा होती है?
नवरात्रि में नौ दिन माँ दुर्गा के नौ रूप पूजे जाते हैं – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। यही नव दुर्गा कहलाती हैं।
होली क्यों मनाई जाती है?
होली की मुख्य कथा भक्त प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका के पास अग्नि में न जलने का वरदान था। वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठी, लेकिन विष्णु कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई – असत्य पर सत्य की जीत। अगले दिन रंगों का त्यौहार मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि पर क्या करना चाहिए?
महाशिवरात्रि पर दिनभर उपवास रखें, रात को चार पहर की शिव पूजा करें, रुद्राभिषेक या महामृत्युंजय जाप करें, जागरण करें और अगले दिन ब्राह्मण भोजन के बाद व्रत का पारण करें।
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति कितने दिन रखी जाती है?
गणपति स्थापना के बाद 1, 3, 5, 7, 9 या 11 दिन तक गणेश जी को घर में रखा जाता है। अनंत चतुर्दशी (11वें दिन) पर सबसे बड़ी विसर्जन यात्रा होती है। आप अपनी सुविधा अनुसार दिन चुन सकते हैं, बस दिनों की संख्या विषम (1, 3, 5, 7, 9, 11) होनी चाहिए।
पितृ पक्ष क्या है?
पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक 15 दिन का वह काल है जब पितरों (पूर्वजों) का स्मरण किया जाता है। इन 15 दिनों में पिंड दान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन से पितृ प्रसन्न होते हैं।
करवा चौथ पर क्या नियम हैं?
करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत प्रारंभ करती हैं, पूरे दिन निर्जल रहती हैं, शाम को करवा माता की कथा सुनकर पूजा करती हैं, और चंद्रमा दर्शन के बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ती हैं।