मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे रहस्यमय और शक्तिशाली माना जाता है। विश्व का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग।
महाकालेश्वर उज्जैन का प्राण है। "महाकाल" का अर्थ है – काल (समय और मृत्यु) के भी स्वामी। जहाँ काल स्वयं नतमस्तक हो, वही महाकाल। इस ज्योतिर्लिंग की तीन विशेषताएं इसे अद्वितीय बनाती हैं –
प्रातः 4:00 बजे होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल का अभिषेक ताज़ी भस्म से किया जाता है। यह भस्म पहले श्मशान की होती थी, अब कंडे (गोबर) की भस्म प्रयोग होती है। यह आरती देखने का अनुभव जीवन भर के लिए अविस्मरणीय होता है।
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पूर्व बुकिंग आवश्यक है। पुरुष धोती और महिलाएं साड़ी में ही प्रवेश ले सकती हैं।
महाकालेश्वर कालसर्प दोष के निवारण के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है। जब कुंडली में सभी ग्रह राहु-केतु के बीच आ जाते हैं, तब यह दोष बनता है। महाकाल में विशेष पूजा से यह शांत होता है।
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महाकाल में किए गए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय जाप का फल अनंत गुना होता है। ये पूजा विशेष रूप से – आयु वृद्धि, रोग निवारण, शत्रु बाधा, आर्थिक संकट के लिए की जाती है।
उज्जैन में हर 12 वर्ष में सिंहस्थ कुंभ होता है। अगला सिंहस्थ 2028 में होगा, जब करोड़ों श्रद्धालु क्षिप्रा में स्नान और महाकाल दर्शन के लिए आएंगे।
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