महाराष्ट्र के एलोरा के पास स्थित। 12 ज्योतिर्लिंगों में अंतिम। घुष्मा नाम की महिला की भक्ति से प्रकट हुए।
देवगिरि पर्वत के पास सुधर्मा नाम के ब्राह्मण की दो पत्नियाँ थीं। पहली सुदेहा निःसंतान थी, दूसरी घुष्मा के पुत्र था। ईर्ष्या से सुदेहा ने घुष्मा के पुत्र को मार दिया।
घुष्मा हर दिन 101 शिवलिंग बनाकर पूजती थीं। पुत्र की मृत्यु पर भी पूजा नहीं छोड़ी। शिव प्रसन्न होकर प्रकट हुए, पुत्र को जीवित किया और घृष्णेश्वर रूप में यहाँ स्थापित हो गए।
घृष्णेश्वर मंदिर विश्व प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं से केवल 1 किमी दूर है। एलोरा की 34 गुफाओं में से कैलाश मंदिर (गुफा 16) एक ही चट्टान से काटकर बनाया गया विशाल शिव मंदिर है।